updates on pension for RRB employees.


updates on pension for RRB employees

updates on pension  for RRB employees.

ग्रामीण बैंक कर्मचारियों की पेंशन पर प्रमुख बिंदु  

ग्रामीण बैंको में भी पेंशन लागु करने की सारी औपचारिकताये सरकार  ने पूरी कर ली है. सरकार के निर्देशानुसार सोमबार को DFS( Department of Financial Services), NABARD( NATIONAL BANK FOR AGRICULTURE AND RURAL DEVLOPMENT) के सीनियर अधिकारियों व पांच ग्रामीण बैंको के चेयरमैनों के साथ सम्पन्न हुई वार्ता में इस संबंध में फैसला लिया गया है. अब यह फैसला अनुमोदन के लिए फिर से सरकार के पास भेजा जाएगा. इससे पहले सभी ग्रामीण बैंको को कुछ जरुरी औपचारिकताये पूरी करने के लिए एक निश्चित समय दिया गया है. सर्वसम्मत्ति से लिए गए फैसले के अनुसार 31 मार्च 2018 से पहले ज्वाइन किये हुए सभी RRBiANS पुरानी पेंशन (बैंकिंग पेंशन स्कीम 1993) और 31 मार्च 2018 के बाद जॉइन किये सभी कर्मचारी National pension scheme के लिए पात्र होंगे.

प्रमुख बिंदु
Important updates on RRB पेंशन

1- जो कर्मचारी 01-09 -1987 को बैंक सेवा में थे, और उसके बाद सेवानिवृत्त हुए, वो सभी लोग पेंशन के पात्र होंगे. पेंशन का भुकतान 01-04-2018 से किया जाएगा
2- दिनांक 31-03-2018 तक सेवा में आये सभी कर्मचारी बैंकिंग पेंशन स्कीम 1993 के लिए पात्र होंगे, उसके बाद आये सभी कर्मचारी NPS (National Pension scheme) के लिए पात्र होंगे.
4- पेंशन फण्ड में NPS की तरह, बैंक कर्मियों पर कोई भार नहीं पड़ेगा.
4- सरकार की प्रमुख शर्त, " ग्रामीण बैंक फायदे में होगा तभी पेंशन मिलेगी" मान्य नहीं होगा, बैंक फायदे में हो या नुकसान में ग्रामीण बैंक कर्मियों की पेंशन अप्रभावित रहेगी.
5- कर्मियों को बैंक के हिस्से वाले PF भुकतान पर कोई व्याज नहीं देना होगा.
अब नाबार्ड मीटिंग के निर्णय को अनुमोदन के लिए भारत सरकार के पास भेजा जाएगा. जिसके बाद भारत सरकार पेंशन के लिए नोटीफ़ीकेशन जारी करेगी.

"Nationalised banks" पहले से ही है, "NationalPensionScheme" के दायरे में

राष्ट्रीयकृत बैंको में पहले से ही "National Pension Scheme" लागू है, राष्ट्रीयकृत बैंको में अप्रैल 2010 से बाद जॉइन किये सभी कर्मचारी पहले ही NPS के दायरें में है. इससे पहले जॉइन किये सभी कर्मचारियों के लिए "बैंकिंग पेंशन स्कीम 1993" है. ग्रामीण बैंको में ख़राब वित्तीय हालात और सरकार पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ का हवाला देकर इसे लम्बे समय तक लटका क्र रखा गया. आखिरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार दो दशक की लंबी लड़ाई के बाद ग्रामीण बैंक कर्मियों की पेंशन का रास्ता खुला है.  

लंबी लड़ाई के बाद हासिल हुआ हक.
आपको बता दे  पेंशन के लिए ग्रामीण बैंक कर्मचारियों की यह लड़ाई दो दशक से ज्यादा पुरानी है. ग्रामीण बैंक के कर्मचारी 2003 से यह लड़ाई लड़ रहें हैं, पहले कर्णाटक और राजस्थान हाई कोर्ट से फैसला अपने पक्ष में आने के बाद सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के कारण यह मामला करीब 20 साल तक चलता रहा. इस दौरान बहुत से ग्रामीण बैंक कर्मी दुनिया छोड़ कर चले गये.

तो 8 साल पहले ही गई होती पेंशन

अगर तत्कालीन सरकार जान बुझ कर कर्णाटक हाई कोर्ट और राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले को लागू करने के रोड़े ना अटकाती तो आज से लगभग 8 साल पहले ही ग्रामीण बैंक कर्मियों को उनका हक मिल गया होता.

90 हज़ार कर्मचारी और 27 हज़ार रिटायर स्टाफ को होगा फायदा

देश भर में इस समय कुल 56 ग्रामीण बैंक कार् कर  रहें है, यह देशभर के सभी 645 जिलों में फैले हुए हैं. जिनमे लगभग 90 हज़ार कर्मचारी काम कर रहें है. जो सीधे-2 इस फैसले से लाभान्वित होंगे. 31 मार्च 2018 से पहले जॉइन करने वाले सभी कर्मचारी " बैंकिंग पेंशन स्कीम 1993" के लिए पात्र होंगे. व 31 मार्च 2018 के बाद जॉइन करने वाले सभी कर्मचारी "National Pension Scheme 2004" के लिए पात्र होंगे.

भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, ग्रामीण बैंक.Backbone of Rural Economy In India
अगर जनगणना 2011 के आकड़ो पर गौर किया जाए, तो आज भी देश की 72 प्रतिशत आबादी आज भी गाँव में ही रहती है, जिनके लिए बैंकिंग सेवा का मुख्य माध्यम ग्रामीण बैंक ही है, 645 जिलों में फैले इनके विशाल नेटवर्क के जरिये यह बिना हाईलाइट में आए, ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान दे रहें हैं. अगर इन्हें "ग्रामीण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़" कहा जाए तो गलत नहीं होगा.

PSL (Priority sector Lending) में सबसे बड़ा योगदान
ग्रामीण अर्थव्यस्था की रीढ़ प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग में सबसे बड़ा योगदान ग्रामीण बैंको का ही है, ग्रामीण क्षेत्र के छोटे-2 उद्योग, कृषि, छोटे और मजोले कुटीर उद्योग, SHG लोन सभी में ग्रामीण बैंको का रोल प्रमुख है.

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