पहली तिमाही में SBI को 4,876 करोड़ का शुद्ध नुकसान, पिछली तीन तिमाही में कुल 15009 करोड़ का भारी नुकसान

2018-19 की पहली तिमाही में SBI को 4,875.75करोड़  का शुद्ध नुकसान, पिछली तीन तिमाही  में कुल 15009 करोड़ का भारी नुकसान 
BANKING-PSUB-SBI-RRB-NEWS-LOSS-FINANCIAL-YEAR-2018-19-CASA

देश के सबसे बड़े पब्लिक सेक्टर बैंक के नुकसान का दौर जो वित्तीय बर्ष 2017-18 के तीसरे क्वार्टर से शुरू हुआ था, रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है. वित्तीय बर्ष 2018-19 के पहले ही क्वार्टर(अप्रैल-जून) में SBI को कुल 4875.75 करोड़ का भारी नुकसान हुआ है, यह SBI की लगातार तीसरी तिमाही है, जिसमें उसे इतना बड़ा घाटा हुआ है, आपको बता दें, की SBI के शेयर मुंबई स्थित BSE सेंसेक्स में 3.79 प्रतिशत गिरकर 304.45 रूपये प्रति शेयर पर आ गये हैं.
इससे पहले वित्तीय बर्ष 2017-18 के चौथे क्वार्टर में भी SBI को 7718 करोड़ का बड़ा घाटा हुआ था. वित्तीय बर्ष 2017-18 के तीसरे क्वार्टर में SBI को 2416 करोड़ का बड़ा घाटा हुआ था, जो बैंक के इतिहास में पहली बार था.
यह भी पढ़े..
पिछले 9 महीने में कुल 15009 करोड़ का नुकसान
फाइनेंसियल इयर 2017-18 के तीसरे क्वार्टर से शुरू हुआ नुकसान का यह सिलसिला अब थमने का नाम नहीं ले रहा है. 2017-18 के तीसरें क्वार्टर में SBI के इतिहास में पहली बार 2416 करोड़ का नुकसान हुआ था, उसके बाद 2017-18 के लास्ट क्वार्टर में SBI ने अपने इतिहास का सबसे बड़ा कुल 7718 करोड़ का भारी नुकसान उठाया था, और अब 2018-19 के पहले क्वार्टर में हुए 4875.75 करोड़ के नुकसान ने बैंक प्रबंधन से लेकर सरकार, निवेशकों तक सबकी नींद उड़ा दी है. इस तरह SBI को पिछले तीन क्वार्टर में कुल 15009 करोड़ के भारी घाटे का सामना करना पड़ा है .देश के सबसे बड़े पब्लिक सेक्टर बैंक में हो रहे लगातार घाटे से सरकार से लेके बैंक मैनेजमेंट तक सकते में है. किसी को भी देश के सबसे बड़े पब्लिक सेक्टर बैंक से लगातार तीसरी तमाही में ऐसे रिजल्ट की उम्मीद नहीं थी. एक समय था जब SBI के शेयर को देश के सबसे भरोसे वाले शेयरों में गिना जाता था, लेकिन पिछले तीन क्वार्टर में लगातार हुए कुल 15009 करोड़ के घाटे से शेयर बाज़ार के बिचौलियों का भरोसा भी SBI से उठता जा रहा है.
NPA घटा फिर भी नुकसान
वित्तीय वर्ष 2018-19 की पहली तिमाही के लिए GROSS NPA 10.69% के ऊचें स्तर पर है, जो 10587 करोड़ घटकर कुल 2,12,840 करोड़ रूपये पर आ गया है. यह पिछले क्वार्टर के GROSS NPA 10.91% से तोडा कम है. अगर NET NPA की बात की जाए तो यह 5.29% के उच्च स्तर पर है, यह पिछले फाइनेंसियल ईयर के मार्च तिमाही के NET NPA 5.73% से तोडा कम है. अगर ट्रेंड देखा जाए टो तोडा-थोड़ा ही सही लेकिन बैंक का NPA कुछ ना कुछ कम तो जरुर हुआ है, फिर भी इतना बड़ा नुकसान बैंकिंग सेक्टर की ख़राब वित्तीय हालात को साफ साफ वयान कर रहा है.
यहाँ गौर करने वाली बात यह भी है, की बैंक का ब्याज शुद्ध लाभ (NET INTEREST INCOME-Ddifference between interest earned and interest Paid) वित्तीय बर्ष 2018-19 के जून क्वार्टर में 21798 करोड़ रही, जो  इसी अवधि में वित्तीय बर्ष 2017-18 के रु17606करोड़ से रु4192करोड़ ज्यादा है. अगर परसेंटेज वाइज देखा जाए तो यह इसी अवधि में एक साल पहले की नेट इंटरेस्ट इनकम से (23.81प्रतिशत ) ज्यादा है. इंटरेस्ट इनकम आन लोन भी 2017-18 के रु36,142करोड से 7.54 प्रतिशत  बढकर रु 38,865करोड हो गई है.  राइट ऑफ की रिकवरी में भी 240 प्रतिशत की वृद्धि होकर यह 712 करोड से 2,426 करोड हो गया है. लेकिन फिर फिर भी बैंक को लगातार नुकसान का सामना करना पड़ रहा है.
टोटल डिपॉजिट्स
वित्तीय बर्ष 2018-19 के पहले क्वार्टर में बैंक का डिपाजिट पिछले फाइनेंसियल इयर की समान अवधि से 5.58 प्रतिशत बढकर रु26,02,534 करोड हो गया है. CASA RATIO भी पिछले फाइनेंसियल इयर की समान अवधि के 44.38% से 69 बेसिस पॉइंट बढकर 45.07% हो गया है.
क्या होता CASA RATIO..??
CASA ratio की फुल फॉर्म है "CURRENT and SAVINGS ACCOUNT ratio"
CASA Ratio BANKING PSUB SBI RRB NEWS LOSS FINANCIAL YEAR 2018 19
CASA Ratio 


यह भी पढ़े..
ग्रामीण बैंक कर्मियों को मिलेगी पेंशन की सौगात
CASA जैसा की इसके नाम से प्रतीत हो रहा है यह किसी भी बैंक में जमा कुल करंट और सेविंग्स अकाउंट डिपाजिट तथा उस बैंक के कुल डिपाजिट का अनुपात होता है. करंट और सेविंग्स डिपाजिट को लो कास्ट डिपाजिट माना जाता है, इसमें बैंक कस्टमर को तुलनात्मक रूप से कम रिटर्न देता है, इसीलिए यह फण्ड के सस्ते श्रोत माने जाते हैं. जिस बैंक का कासा अनुपात जितना अधिक होगा उसकी नेट इंटरेस्ट इनकम भी उतनी ही ज्यादा होगी. क्योकि हाई कासा अनुपात का मतलब है लो कास्ट डिपाजिट.  
अधिकतर बैंक करंट अकाउंट पर कोई ब्याज नहीं देतें हैं, जबकि सेविंग्स अकाउंट पर भी ब्याज की दरें 4 प्रतिशत के आस पास ही होती हैं. जबकि बैंकों को उनके दिये क़र्ज़ पर 10-15 प्रतिशत का रिटर्न मिलता है. जिससे उनकी नेट इंटरेस्ट इनकम बढ जाती है. और नेट इंटरेस्ट इनकम बढ़ने का सीधा मतलब बैंक का प्रॉफिट बढ़ने से है. हाई कासा अनुपात को बैंक के अच्छे परिचालन का सबूत भी माना जाता है.
टोटल एडवांसेज
पहली तिमाही के दौरान SBI का डोमेस्टिक एडवांस 7.21 प्रतिशत बढकर फाइनेंसियल इयर 2017 की समान अवधि के 16,08,883 करोड से बढकर 17,23,443 करोड तथा रिटेल एडवांस में 14 प्रतिशत की बड़ी वृद्धि के साथ 4,90,005 करोड हो गया है. एग्री लोन और इंटरनेशनल लोन में मामूली रूप से क्रमशः 0.52 प्रतिशत तथा 4.43 प्रतिशत की कमी जरुर आई है. लेकिन यह आकड़े तुलनात्मक रूप से काफी छोटे हैं.
क्या है इतने बड़े नुकसान की वजह..???
एक्सपर्ट्स की मुताबिक बैंक को खराब प्रोविजनिंग के चलते इतना बड़ा नुकसान हुआ है, बैंक ने प्रोविजिनिंग को 116 प्रतिशत बढाकर पिछले फाइनेंसियल इयर के 8,929.48 करोड़ से बढाकर 19,228.26 करोड रूपये किया है. इसका मतलब यह है, की बैंक के डूबे हुए कर्ज अभी और बढ़ने की सम्भावना है. पहले ही SBI के विजय माल्या जैसे कुछ बड़े कॉर्पोरेट लोन्स के डूबने की वजह से भारी दबाव में है. अकेले विजय माल्या के किंगफ़िशर लोन में बैंक को 12400 करोड का भारी नुकसान हुआ था. ऐसा लगता है, देश का सबसे बड़ा बैंक भी इतने बड़े नुकसान के बाद ऊबर नहीं पा रहा है. दूसरा बैंक ने एक केस की कानूनी सलाह पर 1952.94 करोड की भारी-भरकम रकम खर्च की है. तीसरा बैंक में 1 नवम्बर 2017 से  लागू नयी सैलरी के बकाया भुकतान(एरियल) पर भी 1659.41करोड की रकम खर्च करनी पड़ी है, जिससे बैंक को इतना बड़ा नुकसान हुआ है.


यह भी पढ़े..

Previous
Next Post »