BOB chairman interview-मोदी सरकार की नीतियों ने बर्बाद किये सरकारी बैंक- रवि वेंकटेश


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देश के तीसरे सबसे बड़े  सरकारी बैंक,  Bank of Baroda (BOB) के चेयरमैन रवि वेंकटेशन ने मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोला है। वेंकटेशन  कहा है, कि मोदी सरकार की कड़ी  नीतियों की वजह से बैंकिंग सेक्टर खत्म  होता  जा रहा है। बॉब के चेयरमैन का कहना है, कि सरकार की कड़ी नीतियों की वजह से सरकारी बैंकों के सामने नए निवेशकों को लुभाने और बुरे वित्तीय हालातों से निकलना मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि इस समय  सरकारी बैंकों को एकजुट होने की  जरूरत है। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो बैंकिंग सेक्टर में प्राइवेट सेक्टर के बैंकों की हिस्सेदारी बढ़ जाएगी। वेंकटेशन  का कहना है कि इस समय कमजोर  बैंकों का विलय करने के बजाए खुद को मजबूत करने की आवश्यकता है। आपको बता दें कि रवि वेंकटेशन अगले महीने सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

बैंकिंगं सेक्टर की जरूरतों के उलट हो रहा काम

अंग्रेजी वेबसाइट ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में वेंकटेशन ने कहा कि भारत  को इस समय कम, बेहतर पूंजीकृत और  सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की आवश्यकता है लेकिन इसके उलट काम हो रहा है।  वेंकटेशन का कहना है कि आज  जानबूझकर बैंकों के निजीकरण पर जोर  दिया जा रहा है। इसका कारण यह है  कि आज सरकारी बैंक अपनी पूंजी और  मार्केट शेयर गवां रहे हैं। बीते वित्त वर्ष में करीब 70 फीसदी जमा प्राइवेट बैंकों  के पास  हुआ है। उन्होंने अनुमान जताया  कि 2020 तक खराब लोन बढ़कर 80 फीसदी तक पहुंच जाएगा। खराब लोन  के बढ़ने से सरकारी बैंकों को पूंजी बढ़ाने और नए लोन देने में परेशानी  होती है। वेंकटेशन ने कहा कि खराब बैलेंस शीट और 51 फीसदी शेयर  सार्वजनिक क्षेत्र के लिए रखने के नियम  से सरकारी बैंकों की नई पूंजी के लिए  सरकार पर निर्भरता बढ़ रही है.

सरकारी बैंकों पर बढ़ रहा खराब लोन का बोझ

 रवि वेंकटेशन ने कहा कि मोदी सरकार की  बैंकिंग सेक्टर की कायापलट करने की योजना को पूरा करना असंभव है। इसका  कारण यह है, कि देश के कुल खराब लोन में 90 फीसदी हिस्सेदारी सरकारी बैंकों की है।  देश के 21 सरकारी बैंकों में से 11 बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के  आपातकालीन कार्यक्रम के सुपरवीजन में  काम कर रहे  हैं। मूडीज की स्थानीय  इकाई इक्रा लिमिटेड भी 2020 तक कुल  ख़राब  लोन बढ़ने की बात कह चुकी है। इक्रा का  कहना है कि 31 मार्च, 2020 तक भारत के कुल खराब ऋण 8 फीसदी  से बढ़कर 9 .5 फीसदी हो जायगा । इसमें  से 80 फीसदी हिस्सेदारी सरकारी बैंको की होगी.

कुल 10.25 लाख करोड़ हुआ NPA, 31 मार्च 2018 तक.

पहले ही 31 मार्च 2018 तक बैंको का ख़राब लोन(NPA) 10.25 लाख करोड हो चुका है, जिसके अभी और बढ़ने की संभावना है. यह 31 दिसम्बर 2017 के 8.86 लाख करोड से 1.39 लाख करोड ज्यादा है. एक अनुमान के मुताबिक यह राशि सभी सरकारी बैंको द्वारा दिये गए कुल लोन का 11 फीसदी के बराबर है.
बैंको के NPA के खतरनाक स्तर को देखते हुए ही, मोदी सरकार पिछले साल 2 लाख करोड का बैंकिंग पॅकेज लेकर आई, जो बैंको के NPA को देखते हुए नाकाफी लग रहा है. sbi जैसा बैंक इतिहास में पहली बार पिछली तीन तिमाही से लगातार घाटे का सामना कर रहा है. पिछले 9 महीने में ही अकेले SBI का कुल घाटा 25000 करोड से ज्यादा है. 

-न्याय-यात्रा-अगस्त 
-शिव करन द्वेवेदी 

-संपादक न्याय यात्रा 

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