Gramin Bank News सरकारी योजनाएं लागू करने में ग्रामीण बैंक बेहतर - नगर विकास एवं आवास मंत्री

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उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक ऑफिसर्स एंड वर्कर्स आर्गेनाइजेशन के  तत्वाधान में आयोजित विजय दिवस एवं सम्मान समारोह में बोलते हुए बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास मंत्री सुरेश कुमार शर्मा ने कहा, "ग्रामीण बैंको की शाखाएँ काफी रिमोट क्षेत्रों में होती हैं, जहाँ बैंकिंग सुविधा की पूरी बुनियाद ग्रामीण बैंको के भरोसे ही होती है. उत्तर विहार ग्रामीण बैंक के विशाल नेटवर्क की वजह से इन रिमोट क्षेत्रों में रहने वाले लोगो को काफी लाभ होता है. उन्होंने कहा तमाम सरकारी योजनाओ को रुट लेवल पर लागू करने में ग्रामीण बैंको का बहुत बड़ा योगदान है. उन्होंने इसके लिए ग्रामीण बैंको में काम करने वाले सभी अधिकारियों व् कर्मचारियों की बंधाई भी दी. पेंशन की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, ग्रामीण बैंको में पेंशन लागू होने से, इसमें काम करने वाले सभी कर्मचारियों को  बहुत बड़ा  लाभ होगा।

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उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक- एक नज़र

उत्तर विहार ग्रामीण का प्रयोजक बैंक सेंट्रल बैंक इंडिया है. 1 मई 2008 को उत्तर बिहार क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और कोशी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के विलय के बाद इसका नया नाम उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक हो गया. वर्तमान में उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक की शाखाये बिहार राज्य के 18 जिलों दरभंगा, कटिहार,  किसनगंज, पूर्वी चम्पारण, गोपालगंज, मधुबनी, मधेपुरा, शिवहर, पूर्णिया, सारण, सहरसा, सुपौल, सिवान, पश्चिम चम्पारण, बैशाली, सीतामणि, अररिया, मुजफ्फरपुर में फैली हुई हैं. बैंक की वेबसाइट के मुताबिक वर्तमान में  बैंक के ग्रहाकों की संख्या 1 करोड़ से ज्यादा है. और यह बैंक नेटवर्क, क्षेत्रफल , एवं कर्मचारियों की संख्या के हिसाब से देश का सबसे बड़ा ग्रामीण बैंक है. बैंक के वर्तमान अद्द्यक्ष श्री आई. एम्. उतरेजा हैं. बैंक का प्रधान कार्यालय मुज्जफरपुर में स्थित हैं.
यहाँ आपको यह बताना जरूरी है, ग्रामीण बैंक पूरे देश के सभी जिलों में कार्य कर रहें हैं, पूरे देश इन बैंकों को 22000 हज़ार ब्रांचों से अधिक का नेटवर्क है. वर्तमान में पूरे देश के सभी ग्रामीण बैंको में 90000 से अधिक कर्मी कार्य कर रहें हैं. 30000 हज़ार से ज्यादा रिटायर स्टाफ है.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अहम रोल.
1970 के दशक में तत्कालीन इंदिरा गाँधी सरकार ने ग्रामीण भारत में बैंकिंग की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, एक आर्डिनेंस के द्वारा इन बैंकों की स्थापना की. इनकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण भारत की बैंकिंग जरूरतों को पूरा करना था..
अगर आज ग्रामीण बैंको की स्थिति को देखा जाए, तो यह अपने उद्देश्य में पुर्णता सफल प्रतीत होतें हैं. आज भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ ग्रामीण बैंक ही है. प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग में सबसे बडा योगदान ग्रामीण बैंको का ही है. आज इन बैंकों की शाखाएं ऐसी जगह तक फैल चुकी हैं, जहाँ राष्ट्रीयकृत या प्राइवेट बैंको को आज भी पहुँचना मुश्किल है. भारत सरकार की कैशलैस योजना के बाद इन बैंकों का महत्व और बढ़ गया है. बृद्धावस्था पेंशन, विकलांग पेंशन, एलपीजी सब्सिडी इत्यादि को बांटने में इन बैंकों का बहुत ही बड़ा योगदान है. जहाँ एक तरफ प्राइवेट बैंक 10000 रुपये से खाता खोलतें हैं, यह बैंक 500 रुपये से खाता खोल देतें हैं। उनमें से भी 80% नो फ्रिल एकाउंट होतें हैं. यानी जीरो बैलेंस खाते. आज भी अगर ग्रामीण बैंक ना हो तो देश की 70 प्रतिशत आबादी वाले ग्रामीण भारत के लिए बैंकिंग इतनी आसान नही रहने वाली है. 

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