digital notice- अब बकायेदार को व्हाट्सएप पर भेजिये लीगल नोटिस, मिली कानूनी मान्यता..


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अब बकायेदार को व्हाट्सएप पर भेजिये लीगल नोटिस, मिली कानूनी मान्यता..

अगर कोई ग्राहक बैंक का लोन नही चुका रहा है, और गलत पता बताकर नोटिस रिसीव नही कर रहा है। तो बैंक की यह समस्या अब दूर हो चुकी है। अब बैंक अपने बकायेदारों को व्हाट्सएप और ईमेल के जरिये डिजिटल माध्यम से भी नोटिस भेज सकतें हैं। और यह स्वतः ही रिसीव माने जायँगे। यह नोटिस पूरी तरह से कानूनी रूप से वैध्य हैं।
आपको बता दें, बैंको को सबसे ज्यादा दिक्कत चेक बाउंस के मामले में होती थी। क्योंकि चेक बाउंस के मामले में कस्टमर को नोटिस की तामील करा पाना थोड़ा मुश्किल हो रहा था। इसीलिए बैंको ने डिजिटल माध्यम से भेजे गए नोटिसों को क़ानूनी मान्यता देने की मांग की थी। जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक कमेटी का गठन किया था, जिसने सुप्रीम कोर्ट में डिजिटल नोटिस की सलाह दी थी. जिसे सुप्रीम  ने सही मानते हुए, व्हाट्सएप समेत सभी डिजिटल माध्यमों से भेजे गए नोटिस को लीगल मान्यता प्रदान कर दी है.। यह निश्चित ही बैंको के लिए काफी लाभदायक होने वाला है. क्योकि कई बार कस्टमर गलत पता बताकर नोटिस रिसीव करने से मना कर देता था। जिससे रिकवरी तथा चेक बाउंस से जुड़े मामलों में बैंको को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था.

देश मे 60 लाख से अधिक चेक बाउंस के मामले अदालत में लटके..
इंटरनेट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक देश मे 60 लाख से अधिक चेक बाउंस में मामले कोर्ट में अटके हैं। जिनमें बहुत सारे मामले कस्टमर तक नोटिस ना पहुँचने की वजह से अटके हैं। डाक या अन्य माध्यमों से भेजे गए नोटिस को रिसीव ना करना कस्टमर के लिए आम बात हो गई थी। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी ने डिजिटल माध्यम से नोटिस भेजने का सुझाव दिया था। जिसे सुप्रीम कोर्ट में मान लिया है।


चेक़ बाउंस में है, 2 साल जेल और दुगने जुर्माने का है प्रावधान.
आपके बता दें, हाल ही में सरकार ने नेगोशियेबल इंस्ट्रूमेंट अमेंडमेंट-1881 में बदलाव करते हुए नेगोशियेबल इंस्ट्रूमेंट अमेंडमेंट बिल-2017 पेश किया था  जिसमे सरकार ने चेक बाउंस से जुड़े कानून को और धार दी है. अगर आपका चेक बाउंस हुआ है, तो चेक बाउंस होने के 15 दिन के अन्दर आपको चेक जारीकर्ता को क्रिमिनल नोटिस भेजना है. नोटिस मिलने के बाद चेक जारीकर्ता को 15 दिन का टाइम दिया जाता है. अगर जारीकर्ता नोटिस मिलने के 15 दिन भीतर आपको धनराशि नहीं देता है, तो फिर इसके बाद चेक जारीकर्ता के खिलाफ क्रिमिनल कार्यवाही शुरू हो जाती है. जिसमे 2 साल की जेल तथा दुगने जुर्माने अथवा दोनों का प्रावधान है. तो अगली बार किसी को भी चेक देने से पहले इससे जुड़े कानून को अवश्य पढ़ लीजिए.
HDFC बैंक ने भेजे डिजिटल माध्यम से भेजे 250 नोटिस
यहाँ आपको बता दें, प्राइवेट बैंक डिजिटल माध्यम से नोटिस भेजना भी शुरू कर दिया है. प्राइवेट सेक्टर की बैंक HDFC बैंक ने अबतक 250 से अधिक नोटिस डिजिटल माध्यम से भेजें हैं. सरकारी बैंको में अभी इसको लेकर बहुत ज्यादा जागरूकता नहीं है. सभी सरकारी बैंको को चाहिए की वो अपने कर्मचारियों को भी इसके लिए ट्रेंड करें. और नोटिस भेजने के लिए डिजिटल माध्यम का प्रयोग करें. जिससे समय व धन दोनों की बचत हो सके.
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