नए नोटों में घटिया कागज का इस्तेमाल.. दो साल में ही बेकार हुए, 2000 और 500 के नए नोट..-रिपोर्ट


नए नोटों में घटिया कागज का इस्तेमाल..
दो साल में ही बेकार हुए, 2000 और 500 के नए नोट..-रिपोर्ट

नोटबन्दी के दो साल हो चुकें हैं। कुछ लोग इसे सरकार का सबसे बेबकूफी वाला कदम मानतें हैं। वहीं कुछ लोग अब भी नोटबन्दी को सही ठहराते हैं। खैर नोटबन्दी का जो उद्देश्य था उसमें तो वो पूरी तरह विफल ही रही। बाकि सरकार चाहे कोई भी हो अपने सबसे बेकार कदम की भी तारीफ ही करेगी.. ऐसी ही हैं हमारी राजनीति। जो काफी गिर चुकी है। एक तरफ BJP है जो कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा बनाई गई हर चीज को बदल देना चाहती है। दूसरी तरफ कांग्रेस है जो आज भी वंशवाद के घोड़े पर सवार होकर अपनी विरासत बचाने में जुटी है.

BJP की हर चीज को बदलने की भावना का ही नतीजा था नोटबन्दी। और उसके बाद नए नोटों का चलन। लेकिन अभी सरकार को नई करेंसी जारी किए हुए 2 साल भी नही हुए है। और नए नोटों की हालत खस्ता होने लगी है। एक अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक 2000 और 500 के नए नोट दो साल में ही इतने बेकार हो चुके हैं। कि अब उन्हें ATM में भी नही डाला जा सकता है। nbsp;

2018 में 10 रुपये के नोट पर भी खतरे के बादल..

2000 और 500 के नए नोटों के अलाबा हाल ही में 2018 में आये 10 रुपये के नए नोटों को भी लेकर खतरा मंडरा रहा है। अखबार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है,"2000 और 500 के नए नोटों के अलाबा 2018 में 10 रुपये के नए नोट भी बैंक इस्तेमाल लायक नही रहे हैं.. nbsp; 

दुबारा प्रिंटिंग में होगा भारी-भरकम खर्च..

अगर घटिया क्वालिटी की वजह से नोटों को फिर से छापने की नौबत आई। तो सरकार पर बड़ा वित्तीय बोझ पड़ेगा। RTI से मिली जानकारी के आधार पर INDIA Today में छपे एक आर्टिकल के मुताबिक सरकार को 500 रुपये का एक नोट छापने में लगभग 3 रुपये का खर्चा आता है। वही 2000 के एक नोट को छापने में लगभग 4.50 रुपये का खर्चा आता है. 

सरकारी दावा- गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं, भारतीय धोती में बाँधते नोट.

अमर उजाला ने अपनी रिपोर्ट में वित्त मंत्रालय के किसी अधिकारी के हवाले से कहा, "सरकार ने नोटों की गुणवत्ता से कोई समझौता नही किया है, नकली नोटों के चलन की वजह से सरकार ने नई कर्रेंसी में कई सेक्युरिटी फ़ीचर डालें हैं। भारतीय लोग नोटों को साड़ी आदि में बाँध लेते हैं जिससे यह नोट जल्दी खराब हो रहें हैं

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