इस राज्य में लागू होगी पुरानी पेंशन।


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केजरीवाल का ऐलान, दिल्ली में लागू होगी, पुरानी पेंशन स्कीम।
लम्बे समय  से पुरानी पेंशन की माँग को लेकर दिल्ली के रामलीला मैदान में आंदोलन कर रहे राज्य व केंद्र सरकार के कर्मचारियों को पहली सफलता मिल गई है. आंदोलित कर्मचारियों को सम्बोधित करने पहुँचे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने मंच से सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बहुत बड़ा ऐलान कर दिया है. कर्मचारियों को सम्बोधित करते हुए अरविन्द केजरीवाल ने  दिल्ली में फिर से पुरानी पेंशन बहाल करने की घोषणा की है. 
लगातार केंद्र सरकार की उपेक्षा झेल रहे यह कर्मचारी केजरीवाल के ऐलान के साथ ही उत्साह से भर गए हैं. दिल्ली के मुख्यमंत्री का यह ऐलान पुरे देश के सरकारी कर्मचारियों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है. और अब पुरे देश में पुरानी पेंशन माँग को लेकर आंदोलन और उग्र होने की पूरी सम्भावना है. 
आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, की अगर मोदी सरकार ने अगले तीन महीने में सरकारी कर्मचारियों की बात नहीं मानी तो 2019 में क़यामत आने वाली है. उन्होंने कहा मोदी सरकार रामलीला मैदान  श्राप अपने ऊपर ना ले. 
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केजरीवाल ने कहा, की वो बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, केरल के मुख्यमंत्री व कर्णाटक के मुख्यमंत्री को भी अपने-अपने राज्यों में पुरानी पेंशन लागू करने के लिए पत्र लिखेंगे।



कर्मचारियों ने भी ली शपथ.. 
रामलीला मैदान में आंदोलन रहे कर्मचारियों ने भी शपथ ली है, की वो सिर्फ उसी पार्टी को वोट देंगे जो पार्टी अपने घोषणा पत्र में पुरानी पेंशन स्कीम लागू करने की घोषणा करे करेगी । इसी के साथ यह साफ़ हो गया की 2019 के चुनाव में पुरानी पेंशन एक बहुत बड़ा मुद्दा बनने जा रही है. चुनावी माहौल में केजरीवाल के ऐलान बाद अब मोदी सरकार को भी कर्मचारियों की बात को अनसुना करना महंगा पड़ सकता है. 

देश में कुल कितने सरकारी कर्मचारी
देश में कुल कितने सरकारी कर्मचारी हैं, इसका एक दम सही डाटा तो खुद सरकार के पास भी नहीं है, लेकिन एक अनुमान के मुताबिक देश में सरकारी कर्मचारियों की संख्या 2 करोड़ 15 लाख के आस-पास है. जाहिर है, कोई भी सरकार चुनावी माहौल में इतनी बड़े वोट बैंक को नाराज करने का जोखिम नहीं उठाएगी। बस जरुरत है, तो एकजुट होकर आंदोलन करने की..  
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क्यों हो रहा है, न्यू पेंशन स्कीम का विरोध
वर्तमान में लागू, "न्यू पेंशन स्कीम" को 2004 में, उस समय की तत्कालीन अटल बिहारी सरकार लायी थी. जिसके द्वारा पुरानी पेंशन को ख़त्म कर दिया गया था. न्यू पेंशन स्कीम की सबसे बड़ी खामी यह है, की इसमें कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद कितनी पेंशन मिलेगी इसका कोई ज़िक्र नहीं है. इसमें कर्मचारियों के वेतन से हर महीने 10% की कटौती जाती है, और इतना अंशदान सरकार देती है. लेकिन यह पैसा अलग-अलग म्यूच्यूअल फण्ड कंपनियों जैसे LIC MUTUAL FUNDS, SBI MUTUAL FUNDS  आदि के द्वारा शेयर मार्किट की अलग-अलग कंपनियों में लगा दिया जाता है. जो कर्मचारियों की नज़रो में काफी जोखिम भरा है.

उत्तर प्रदेश में भी चल रहा है, आंदोलन।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी राज्य के कर्मचारी व शिक्षक पुरानी  पेंशन बहाली को लेकर आंदोलन कर रहें हैं. सोमवार को प्रदेश के राज्य कर्मचारियों व सरकार के बीच तीसरे चरण की वार्ता की शुरुआत होगी। राज्य के कर्मचारी व शिक्षक, "पुरानी पेंशन बचाओ मंच" के बैनर तले आंदोलन कर रहे है. अभी तक सरकार और मंच के बीच दो बैठक हो चुकी हैं. लेकिन अभी तक कोई भी नतीजा नहीं निकला है. कर्मचारियों ने सरकार से दो टूक कह दिया है. उन्हें पुरानी पेंशन से कम कुछ भी मंजूर नहीं है. अब केजरीवाल के ऐलान के बाद यु. पी. की योगी सरकार भी दबाव में होगी। और उसके लिए भी बहुत लम्बे समय तक कर्मचारियों की मांगो को नजरअंदाज कर पाना आसान नहीं होगा।  
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