NPA- 2017-18 में सरकारी बैंकों के 6000 हज़ार कर्मचारी खराब लोन के लिए जिम्मेदार: अरुण जेटली



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2017-18 में सरकारी बैंकों के 6000 हज़ार कर्मचारी खराब लोन के लिए जिम्मेदार: अरुण जेटली
Highlights
*पिछले साल सरकार ने 6000 से ज्यादा अधिकारियों पर की कार्यवाही.
*कार्यवाही में  बर्खास्तगी, फोर्सफुल रिटायरमेंट और पदावनति (Demotion)   शामिल.
*पिछले 2 साल में 3.77 लाख करोड़ बड़ा NPA.
*वर्तमान में बैंको का NPA रिकॉर्ड 9.43 करोड़ के स्तर पर.
*2018 की पहली तिमाही में रिकॉर्ड 60000 करोड़ से ज्यादा की रिकवरी.

RRBNEWS:- शुक्रवार को सरकार ने अपने लिखित जबाब में कहा, की उसने पिछले वित्त वर्ष में 6000 से ज्यादा बैंक अधिकारियों को खराब लोन(NPA) के लिए जिम्मेदार मानते हुए उन पर कार्यवाही की है.

मेरी नज़रों में देश के अब तक के सबसे विफल वित्त मंत्री अरुण जेटली जी ने अपने लिखित जबाब में कहा," पिछले वित्त वर्ष में 6000 से अधिक बैंक अधिकारियों को खराब लोन का जिम्मेदार मानते हुए उन पर छोटी-बड़ी कार्यवाहियां की गईं हैं. इसमें बर्खास्तगी, फोर्सफुल रिटायरमेंट और डिमोशन जैसी कार्यवाहियां शामिल हैं."

वित्त मंत्री ने बताया," की वित्त वर्ष 2017-18 में 6049 बैंक अधिकारियों को NPA खातों में लापरवाही और जान-बुझ कर गलती का दोषी मानते हुए उन पर कार्यवाही हुई है.
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बैंक अधिकारियों पर उनके अपराध के हिसाब से दोषी मानते हुए, छोटी और बड़ी कार्यवाही हुई है। साथ ही मामले की गंभीरता के आधार पर
सभी मामलों में CBI या लोकल पुलिस द्वारा इन अधिकारियों के खिलाफ FIR भी दर्ज कराई गई है।

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सरकारी बैंकों की बर्बादी, देश की अर्थव्यवस्था चौपट.

लगातार सरकारी हस्तक्षेप के कारण सरकारी बैंको की हालत बेहद खस्ता हो चुकी है. तीन सरकारी बैंक पहले ही पूरी तरह बर्बाद हो चुकें हैं। वो बात अलग है सरकार ने बढ़ी ही चालाकी से इनकी बर्बादी की जिम्मेदारी अपने ऊपर नही आने दी। बर्बाद होने वाले बैंको में से एक को सरकार ने देश की सबसे सफल सरकारी बीमा कंपनी को बेचकर बढ़ी ही चालाकी से बैंक को डुबाने की जिम्मेदारी से खुद को बचा लिया। इसके बाद देना बैंक और विजया बैंक का भी विलय अगर बैंक ऑफ बड़ौदा में ना किया जाए. तो यह बैंक भी बहुत ही
जल्दी दिवालिया हो सकते थे। लिहाज़ा विपक्ष के आरोपों से बचने के लिए सरकार ने बड़ी ही चालाकी से तीन बैंको के डूबने को राजनैतिक मुद्दा बनने से बचा लिया..

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लगातार घाटे में हैं सरकारी बैंक..
आपको बता दें, जो SBI अपने इतिहास में आजतक कभी घाटे में नही गया। वो SBI भी पिछली 3 तिमाही से लगातार घाटे में चल रहा है. SBI का घाटा वित्तीय बर्ष 2017-18 के तीसरे क्वार्टर से शुरू हुआ था, जो अब रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है. वित्तीय बर्ष 2018-19 के पहले ही क्वार्टर (अप्रैल-जून) में SBI को कुल 4875.75 करोड़ का भारी नुकसान हुआ हैयह SBI की लगातार तीसरी तिमाही थी। जिसमें उसे इतना बड़ा घाटा हुआ था. आपको बता दें, पहली बार SBI के शेयर मुंबई स्थित BSE सेंसेक्स में 3.79 प्रतिशत गिरकर 304.45 रूपये प्रति शेयर पर आ गये थे।


इससे पहले वित्तीय बर्ष 2017-18 के चौथे क्वार्टर में भी SBI को 7718 करोड़ का बड़ा घाटा हुआ था. वित्तीय बर्ष 2017-18 के तीसरे क्वार्टर में SBI को 2416 करोड़ का बड़ा घाटा हुआ थाजो बैंक के इतिहास में पहली बार था. पिछले 9 महीनें में सिर्फ SBI को ही कुल 15009 करोड़ का भारी- भरकम नुकसान हुआ है. 

मार्च 16 में 5.66 लाख करोड़ NPA, 2018 में हुआ 9.62 लाख करोड़..
लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने अपने लिखित जबाब में कहा, की बैंको का NPA मार्च 2016 के 5.66 लाख करोड़ से मार्च 2018 में 9.62 लाख करोड़ हो चुका है। हालांकि उन्होंने इसमें यह भी जोड़ा की ऐसा NPA को पारदर्शिता के साथ दिखाने की वजह से हुआ है।
हालांकि यह अब थोड़ा कम होकर 9.43 लाख करोड़ के स्तर पर आ गया है। उन्होंने बताया कि 2018 के पहले हाफ में सरकारी बैंकों ने रिकॉर्ड 60000 करोड़ रुपये से भी अधिक की रिकवरी की है. जो पिछले साल ने इसी समय मे की गई कुल जल्दी  रिकवरी की दुगनी है.

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