BOB, Dena Bank, और विजया बैंक के मर्जर के विरोध में, बैंक करेंगे 26 को हड़ताल.


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RRB NEWS ब्यूरो- देशभर की बैंक यूनियनों ने 26 दिसंबर को देशव्यापी हड़ताल की चेतावनी दी है. बैंक यूनियन Bank Of Baroda, Dena Bank और Vijaya Bank के प्रस्तावित विलय का विरोध कर रहें हैं. आपको बता दें सरकार ने हाल ही में Bank Of Baroda, Vijaya bank तथा Dena Bank के विलय को सैद्धान्तिक मंजूरी  दी है. जिसका बैंक की सभी यूनियन विरोध कर रहीं हैं. उनका कहना है, विलय को लेकर सरकार की मंशा ठीक नहीं है. यूनियन का कहना है, की बैंक कर्मचारियों के विरोध के बाबजूद सरकार विलय की प्रक्रिया को आगे बड़ा रही है. इसीलिए अब हड़ताल के अलाबा और कोई रास्ता नहीं बचा है.
आपको बता दें, हाल ही में सभी बैंक के बोर्ड ने इस प्रस्ताव को हरी झण्डी दिखाने की औपचारिकता निभा दी है. इन तीनों बैंको के विलय से बनने वाला बैंक  SBI और HDFC बैंक के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक होगा. जिसके पास 14.82 लाख करोड़ का बिज़नेस होगा
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सरकार के बैंको के विलय की नीति तात्कालिक स्तर पर कुछ राहत जरूर दे सकती है. लेकिन लम्बे समय में सरकार की यह नीति कारगर साबित होती नही दिख रही है. वर्तमान समय मे नए डिपॉजिट का 70% प्राइवेट बैंको के पास है. 
नए लोन का भी 80% हिस्सा आज प्राइवेट बैंको के पास ही है. जबकि नेटवर्क के मामले में प्राइवेट बैंक सरकारी बैंकों से बहुत पीछे हैं. फिर आखिर क्यों सरकारी बैंक प्राइवेट बैंको से इतना पिछड़ रहें हैं ??

क्या है NPA बढ़ने की वजह..
भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था के मद्देनजर नज़र हर सरकार वोट बैंक के लिए लोक-लुभावनी योजनाएं बनाती है. लोन-माफी जैसी चीजें लोगो को बैंको का कर्ज ना चुकाने के लिए प्रेरित करतीं हैं. लोगों में आर्थिक लापरवाही की ऐसी मंशा पनपने लगी है. जो किसी भी मज़बूत से मज़बूत बैंकिंग सिस्टम को तबाह कर सकती है. दूसरा कॉरपोरेट लोन के मामले में सरकारी हस्तक्षेप इतना ज्यादा है कि बैंक अधिकारी सिर्फ सिग्नेचर करने के अधिकारी हो जातें हैं। उसके बाद रिकवरी में भी बैंक अधिकारियों को कार्यवाही करने की आज़ादी नही होती. आप सरकार से इस बारे में कोई सवाल करेंगें. तो कोई भी सरकार इसे नकार देगी. लेकिन यह चीजें हमेशा से थी और आज भी हैं। जब तक आप अपने सरकारी  बैंकिंग-सेक्टर को आज़ाद नही करते. बैंको की हालत में सुधार संभव नहीं दिखता.

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