मिशाल: जब बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक कर्मचारियों ने 36 में अपने साथी के लिए जुटाए 2.71 लाख रुपये.. यूनियन की सजगता ने बचाया एक परिवार।

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RRBNews:-   दोस्तों कहतें हैंआजकल के समय मे कोई किसी की मदद नही करता। और हमारी युवा पीढ़ी पर स्वार्थी होने के सबसे ज्यादा आरोप लगतें हैं। ऐसे में बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक के युवा कर्मचारियों ने मानवता की मिशाल पेश की है।

बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक के कर्मचारियों ने  व्हाट्सएप के जरिये अपने जरूरत मंद साथी के लिए 36 घण्टे से भी कम समय मे 2.71 लाख रुपये जमा कर करने की मिशाल पेश की है।
हताशा इस कदरकी सोचने लगे आत्महत्या की
बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक के प्रयागराज(इलाहाबाद) रीजन की एक ब्रांच पर कार्यरत एक कर्मचारी अपनी पत्नी और दो नवजात बच्चों के बीमार होने की वजह से अत्यधिक मानसिक दबाव में थे। और ऐसे समय मे उनके पास पैसों की तंगी ने उनको एकदम हताश कर दिया था।
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यह कर्मचारी इस कदर हताश हो चुके थे। कि इन्होंने बैंक से जुड़े एक व्हाट्सएप ग्रुप में आत्महत्या जैसा कदम उठाने की सोच ली थी। रीजनल मैनेजर को सम्बोधित अपने मैंने मैसेज में इन्होंने अपने बाद अपनी जॉब अपनी पत्नी को देने की बात कही थी।
यूनियन के ग्रुप में लिखा मैसेज
बैंक की यूनियन से जुड़ेरोहित गंगवार ने बतायाकी वो बैंक की यूनियन के इलाहाबाद रीजन के व्हाट्सएप ग्रुप में मेंबर हैं। जिसमे अचानक उनकी नज़र इस मैसेज पर पड़ी। जब उन्होंने मैसेज देखाउन्होंने तत्काल यूनियन के महासचिव राम कृष्ण पांडेयजो कि इलाहाबाद के ही हैंको फ़ोन किया। जिसके बाद यूनियन के महासचिव ने रात के 11 बजे उक्त कर्मचारी से मुलाकात की। और काफी समझाने के बाद उनको कोई गलत कदम ना उठाने के लिए मनाया। 
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आर्थिक तंगी को बताया जिम्मेदार
जब राम कृष्ण पांडेय जी ने उक्त कर्मचारी से वजह पूछी। तो उसने अपनी पत्नी की खराब हालत और आर्थिक तंगी को जिम्मेदार बताया। जिसके बाद यूनियन के महासचिव राम कृष्ण पांडेय और कन्वेनर रोहित गंगवार ने सभी कर्मचारियों सेव्हाट्सएप के जरिये सुमित को आर्थिक मदद देने का कैम्पेन चलाया।
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रात में 11 बजे शुरू किया कैम्पेन
जनवरी की रात 11 बजे शुरू हुए इस कैम्पेन के बाद मात्र 24 घण्टे में सीधे सुमित के खातें में लगभग लाख रुपये जमा हो गए। अगले दिन 70 हज़ार रुपये और जमा हो गए। कुल मिलाकर सिर्फ 36 घण्टे में ही सुमित को सीधे लाख 71 हज़ार रुपये की भारी रकम इन कर्मचारियों ने अपने पास से सुमित के खातें में भेज दी।
सभी ने अपनी सैलरी से दिए पैसे..
लाख 71 हज़ार रुपये की यह राशि सभी कर्मचारियों ने अपनी सैलरी से दी थी। जिससे जो बन पाया सभी ने अपनी क्षमता के अनुसार सुमित की मदद की। यहाँ तक पीलीभीत की जमुनिया ब्रांच के डेली वेजर जो दिन में मात्र 240 रुपये कमातें हैं ने भी 500 रुपये का योगदान दिया। किसी ने 500 किसी ने 1000 किसी ने 1500, 2000 और 3000 रुपये तक का योगदान दिया।
खुद यूनियन के महासचिव राम कृष्ण पांडेय ने भी कुल 5000 हज़ार का योगदान दियाकन्वेनर रोहित गंगवार ने भी 1000 रूपये का योगदान दिया। 
उम्मीद थी लाख कीजमा हो गया लाख 71 हज़ार।
इस कैम्पेन को चलाने वाले रोहित गंगवार और राम कृष्ण पांडेय को भी खुद यह उम्मीद नही थी। कि सिर्फ 36 घण्टे में इतना पैसा जमा हो जाएगा। रोहित गंगवार ने बतायासुमित की हालत को देखते हुए जब हमने कैम्पेन चलाया था। तब हमें उम्मीद थी इस एक कैम्पेन से सुमित को लगभग लाख रुपये की आर्थिक मदद हो जाएगी।


कैपेंन चलाने वालों को ही कहना पड़ाबस हो गया पर्याप्त.. 
इस कैम्पेन के प्रमुख प्रमोटर रोहित गंगवार ने बताया कि जब 36 घण्टे में लाख 71 हज़ार रुपये जुट गए तो उन्होंने खुद व्हाट्सएप मैसेज लिखकर लोगो को बताया कि पर्याप्त धन जमा हो चुका है। अतः अब और धनराशि जमा ना करें।
मिशाल बनेंयुवा कर्मचारी.
आज की इस मतलबी दुनिया मेजिसमे इंसान एक-एक रुपये का हिसाब रखता है। और जिस समय पैसा ही सबकुछ बनता जा रहा है। ऐसे में बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक के यह युवा कर्मचारी मिशाल बन गए हैं। जिन्होंने मात्र 24 घण्टें में अपनी साथी के लिए लाख 71 हज़ार रुपये जमा कर दिए। और सभी ने यह पैसे अपनी सैलरी से और स्वेच्छा से दिए।
पैसे भेजने वाले 99% प्रतिशत कर्मचारी उसको जानते भी नहीजिसके लिए उन्होंने मदद की।
यूनियन पदाधिकारियों की सजगता ने बचाया एक परिवार.
ग्रामीण बैंको की सबसे बड़ी यूनियन अरेबिया के पदाधिकारियों की सजगता की वजह से बैंक के एक कर्मचारी की जान बच गई। अगर सही समय पर यूनियन के पदाधिकारी सजग ना होते तो सायद यह कर्मचारी मानसिक तनाव में कोई न कोई गलत कदम उठा लेता।

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