Dakshin Bihar Gramin Bank- ऋण वसूली को गये ग्रामीण बैंक कर्मियों पर हमला।।


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बिहार के हिसुआ के बिधौल गांव में ऋण वसूली के लिए गए, दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंक के कर्मचारियों पर गांव वालों ने हमला बोल दिया। मंगलवार दोपहर बैंक की टीम जिसमें रसलपुरा शाखा के सहायक देवी लाल, शेखपुरा शाखा के सहायक प्रबंधक चंदन  सिंह , बस्तीविगहा शाखा के सहायक प्रबंधक रविकांत तथा मसौढ़ा शाखा के सहायक प्रबंधक रंजीत कुमार व् लक्ष्मी रिकवरी एजेंसी के कौशलेन्द्र कुमार, ऋण खाताधारक रणविजय के घर पर लोक अदालत के तहत समझौता करने गए थे. लेकिन रणविजय जब बैंक के नियमों  के तहत  60 प्रतिशत राशि देने को भी तैयार नहीं हुआ। तब टीम मजबूरन ट्रैक्टर को जब्त करने का प्रयास करने लगी. तभी रणविजय ने अपने 25-30 साथियों को बुलाकर टीम को धमकाना शुरू कर दिया। जैसे-तैसे जब टीम वहाँ से निकलने लगी. तभी रणविजय व् उसके साथियों ने बैंक कर्मियों पर हमला बोल दिया। जिसमें रिकवरी एजेंसी के कौशलेन्द्र कुमार व टीम को काफी चोटें आयी हैं.



2009 से आजतक नहीं चुकाई एक भी क़िस्त.

बुधौल गांव के निवासी रणविजय सिंह ने दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंक की रसलपुर शाखा से 2009 में 4 लाख 25 हज़ार का ट्रैक्टर लोन लिया था. 2009 से आजतक रणविजय के द्वारा लोन की एक भी क़िस्त का भुकतान नहीं किया गया. बैंक ने उन्हें तमाम नोटिस भेजे। लेकिन उसकी तरफ से किसी भी नोटिस का कोई जबाब नहीं दिया गया. बैंक ने उसे लोक अदालत के तहत 60 प्रतिशत रकम चुकाकर समझौता करने का ऑफर भी दिया। लेकिन रणविजय इस पर भी तैयार नहीं हुआ. जिसके बाद मज़बूरन बैंक को ट्रैक्टर जब्त करने  प्रयास करना पड़ा.

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4000 की नकदी, सोने की चैन व् मोबाइल भी लूटा

ग्रामीणों ने बैंक की टीम के साथ ना सिर्फ मारपीट की. बल्कि उनका कीमती सामान व् नकदी भी लूट ली. रणविजय व् इसके साथियों ने बैंक की टीम से 4000 रूपये की नकदी, सोने की चैन, व सैमसंग के दो मोबाइल भी लूट लिए. रिकवरी कम्पनी के कौशलेन्द्र का 1 लाख कीमत का एप्पल मोबाइल भी गांव वालों ने तोड़ दिया।

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लोगों में बढ़ रही, कर्ज लेकर का चुकाने की आदत

देश में जब से कर्जमाफी और राजनैतिक पार्टियों ने बैंको के लोन पर राजनीति करनी शुरू की है. तभी से लोगो  में कर्ज लेकर न चुकाने की प्रवत्ति घर करने लगी है।  देश में लोगों में आर्थिक लापरवाही की जो टेंडेंसी पनपती जा रही है. वो एकदिन देश को आर्थिक रूप से बहुत बड़ा नुकसान पहुंचाएगी। आजकल बैंक कर्मियों के लिए लोन की रिकवरी करना काफी मुश्किल होता जा रहा है. आलम यह है, रिकवरी पर बैंक कर्मियो से कहा जाता है, तुमने अपनी जेब से थोड़े दिया है। सरकारी पैसा है. हम दे या ना दे तुम्हे क्या दिक्कत है. आये दिन बैंक कर्मियों पर हमले की खबरें भी अक्सर आती ही रहतीं हैं. जल्द से जल्द सरकार को इस सम्बन्ध में शख्त कदम उठाने की जरूरत है। वरना वो दिन दूर नहीं जब हम पुरे बैंकिंग सिस्टम  बर्बाद होता देखेंगे।

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