ग्रामीण बैंको में भी अनुकंपा नियुक्ति बहाल, नाबार्ड ने जारी किया सर्कुलर, अब सभी बैंको की बारी..


RRBNews:- ग्रामीण बैंको में लंबे समय से पेंडिंग अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) लागू हो गया है। कल मिली खबर के मुताबिक आज नाबार्ड ने इससे जुड़ा सर्कुलर जारी कर दिया है। अब जल्द ही बैंको के द्वारा जरूरी कार्यवाही ने बाद ग्रामीण बैंको में अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) लागू हो जाएगी।

देशभर के ग्रामीण बैंकों में हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद अनुकंपा नियुक्ति लागु ना करने के लिए हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी। हाल ही मेंइलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए बैंकिंग सचिव को कड़ी फटकार लगाते हुएउनसे पूछा था। क्यों ना कोर्ट के आदेशों अवमानना का दोषी मानते हुए आप के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करते हुए आपको दंडित किया जाए।


इसी के बाद लम्बे समय से अनुकंपा नियुक्ति लटकाने वाले सरकारी अधिकारियों की आँखे खुली थी। हाई कोर्ट द्वारा जेल भेजने की धमकी ने बैंकिंग सचिव को ग्रामीण बैंको में भी तत्काल ग्रामीण बैंको में भी अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) बहाल करने को मजबूर  कर दिया। 
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आपको  बता देंबड़ौदा Baroda UP Gramin Bank के कर्मचारी मनमोहन प्रसाद की मृत्यु 12 अगस्त 2014 को हो गई थीमनमोहन प्रसाद के पुत्र जितेंद्र कुमार ने  बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक से अपने पिता की जगहग्रामीण बैंको में भी अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment)  की मांग की थी।

लेकिन ग्रामीण बैंकों में ऐसी कोई व्यवस्था ना होने के कारणबैंक ने जितेंद्र कुमार को नौकरी देने से इनकार कर दिया थाइस पर जितेंद्र ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ ब्रांच मेंबैंक तथा भारत सरकार को पार्टी बनाते हुए केस दायर किया था। जिस पर सुनवाई करते हुए लखनऊ हाई कोर्ट ने भारत सरकार को आदेश दिया थाकि तत्काल प्रभाव से 3 महीने के भीतर ग्रामीण बैंकों में भी अनुकंपा नियुक्ति लागू की जाए तथा जितेंद्र को उनके पिता की जगह नौकरी दी जाए।

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राष्ट्रीय कृत बैंकों में है 2014 से अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान

आपको बता दें राष्ट्रीय कृत बैंकों में 2014 से ही अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान हैइसके बावजूद अब तक ग्रामीण बैंकों में अनुकंपा नियुक्ति लागू नहीं हो पाई हैयह भारत सरकार का ग्रामीण बैंकों के साथ सौतेला व्यवहार का सबसे बड़ा उदाहरण हैग्रामीण बैंकों में अनुकंपा नियुक्ति ना होने की वजह सेहजारों परिवार रोजी रोटी के लिए भटक रहे हैं।


कोर्ट के आदेश के की भी अनदेखी..

कोर्ट ने 31 मई 2018 को ही भारत सरकार के वित्त सचिव को 3 महीने के भीतर ग्रामीण बैंकों में अनुकंपा नियुक्ति लागू करने का आदेश दिया थालेकिन 6 महीने बाद भी वित्त सचिव ने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाईप्रार्थी जितेंद्र ने वित्त सचिव को एक रिमाइंडर लेटर भी भेजाजिसका उन्हें कोई जवाब नहीं मिला.

लंबे इंतजार के बाद जितेंद्र को मजबूरन दोबारा कोर्ट की शरण में जाना पड़ा। इस पर हाईकोर्ट ने वित्त सचिव की फटकार लगाते हुएउनसे पूछा थाक्यों ना आपको जानबूझकर कोर्ट के आदेश की अवमानना का दोषी मानते हुएआप के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए.








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