पेंशन पेमेंट करने वाला देश का बैंक बना, उत्तराखंड ग्रामीण बैंक। हरी राम आर्य पेंशन पाने वाले देश के पहले RRBiAN

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के 300 दिन बाद आखिरकार ग्रामीण बैंक के रिटायर स्टाफ को पेंशन मिलनी शुरू हो गई है. उत्तराखंड के देहरादून में स्थित व स्टेट बैंक ऑफ इंडिया प्रयोजित उत्तराखंड ग्रामीण बैंक, पेंशन पेमेंट करने वाला देश पहला ग्रामीण बन गया है.  उत्तराखण्ड ग्रामीण बैंक से रिटायर श्री हरी राम आर्य को 36634/- रूपये पहली पेंशन के रूप में प्राप्त हुए हैं. वो पुरे देश में राष्ट्रीयकृत बैंको के समान पेंशन पाने वाले देश के पहले आरआरबीयन बन गए हैं. हमारी वेबसाइट ने काफी पहले ही कहा था, की जनवरी के आखिरी सप्ताह तक ग्रामीण बैंक कर्मियों को पेंशन  मिलने की शुरुआत हो जायेगी। श्री हरी राम आर्य जी को यह पेंशन दिसंबर माह के लिए मिली है. यानी उत्तराखंड ग्रामीण बैंक ने दिसंबर माह से पेंशन का भुकतान शुरू किया है. ग्रामीण बैंक में सबसे पहले पेंशन पेमेंट के लिए चेयरमैन संजय अग्रवाल ने काफी मेहनत की थी. ग्रामीण बैंको की सबसे बड़ी यूनियन अरेबिया ने उनका धन्यबाद किया है.

क्या होगा एरियर का..??
ग्रामीण बैंको में पेंशन 1 अप्रैल 2018 से लागू हुई है. जिसे लेकर ग्रामीण बैंक कर्मी खासे नाराज़ हैं. ग्रामीण बैंक कर्मियों ने सरकार पर पेंशन की आत्मा को खत्म करने का आरोप लगाया है. जिसका लगातार विरोध भी हो रहा है. लेकिन अगर पेंशन का भुकतान  1 अप्रैल 2018 से भी लागू होता है. तब भी अप्रैल से दिसंबर तक का एरियर बनता है. जिसका भुकतान बैंक अगले फाइनेंसियल ईयर में करेगी।




सरकार ने आधा-अधूरा लागू किया सुप्रीम कोर्ट का आदेश
यूनाइटेड फोरम ऑफ आर. आर. बी. यूनियनस के राष्ट्रीय महासचिव और पेंशन की लड़ाई के प्रमुख सूत्रधारों में से एक शिव करन द्विवेदी ने बताया, लम्बे समय से लंबित ग्रामीण बैंक कर्मियों को पेंशन, सुप्रीम कोर्ट के 25 अप्रैल 2018 के आदेश के बाद मिली। लेकिन सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की धज्जिया उड़ाते हुए मनमाने तरीके से पेंशन लागू की है. सबसे पहले सरकार ने राष्ट्रीय बैंको की यूनियनस के दबाव में पेंशन की कट-ऑफ डेट को मनमाने तरीके से अप्रैल 2010 कर दिया। जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहीं भी अप्रैल 2010 का ज़िक्र  तक नहीं है. यहाँ तक की इससे पहले भारत सरकार खुद अप्रैल 2012 तक के लोगों को पेंशन देने का हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में दे चुकी है. और पेंशन लागू होने के शुरूआती क्रम में नाबार्ड ने भी कट-ऑफ डेट अप्रैल 2018 मानकर कर कार्यवाही शुरू की थी. जिसे बाद में राष्ट्रीयकृत बैंको की यूनियनस के दबाव में 2010 कर दिया गया.
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अप्रैल 2010 डेट कहाँ से आयी, किसी के पास कोई जबाब नहीं।
शिव करन द्विवेदी जी ने यह भी बताया, की जब सरकारी अधिकारियो से 2010 की डेट के बाबत पुछा जाता है, तो वो चुप्पी साध जातें हैं. और उनके पास इसका कोई भी जबाब नहीं होता। राष्ट्रीयकृत बैंको में 2010 की कट-ऑफ इसलिए है, क्योकि वहाँ पर सबसे पहले 2010 में पेंशन लागू की गयी. इसलिए उस समय तक बैंक सेवा में आये सभी लॉगो को पेंशन के दायरे में रखा गया. इसी तरह ग्रामीण बैंको में भी पहली बार पेंशन 2018 में लागू हुई. तो फिर यह 2010 से कैसे लागू हो सकती है..?? यहाँ सरकार ने अपनी मनमानी की है. जिसके लिए अरेबिया एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है.



दो दशक लम्बी कानूनी लड़ाई

 ग्रामीण बैंक के कर्मचारी 2003 से पेंशन की लड़ाई लड़ रहे थे, लेकिन सरकारें लगातार पेंशन लागू करने से  इंकार कर रही थी, पेंशन लागू ना करने के पीछे सरकार का प्रमुख तर्क ग्रामीण बैंकों को घाटे में होना बताया गया  था, लेकिन RBI फाइनेंसियल ईयर 2017 की रिपोर्ट के अनुसार 56 में से 49 ग्रामीण बैंक प्रॉफिट में थे. जिससे सरकार का यह तर्क भी निरर्थक हो गया. ग्रामीण बैंको की सबसे मजबूत व् बड़ी यूनियन अरेबिया लगातार इस लड़ाई को कोर्ट के अंदर और बाहर मज़बूती से लड़ रही थी, जिसके सुखद परिणाम आज सभी ग्रामीण बैंक कर्मियों को मिले हैं. नेशनल फेडरशनं आफ आरआरबी ऑफिसर्स (आल इंडिया रीजनल रूरल बैंक एम्प्लाइज एसोसिएशन) के अद्द्यक्ष सगुण शुक्ल ने अपने सन्देश में कहा, की सरकार के  फैसले से 86000 हज़ार स्टाफ और जबकि ग्रामीण बैंक कर्मियों के वकील ने केंद्र की दलीलों का विरोध करते हुए कहा था, की ग्रामीण बैंक कर्मी राष्ट्रीयकृत बैंक कर्मियों से ज्यादा कठिन हालात में काम करते हैं,  उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 2001 के साऊथ मालाबार मामले में दिए गए निर्णय का हवाला दिया था जिसमे कोर्ट ने कहा था, "ग्रामीण बैंक कर्मियों को भी राष्ट्रियकृत बैंको के समान वेतन मिलना चाहिए" उन्होंने 29 अक्टूबर 1993 के राष्ट्रीयकृत बैंक यूनियन और भारत सरकार के बीच पेंशन को लेकर हुए करार को आधार बनाकर ग्रामीण बैंक कर्मियों के लिए भी पेंशन की मांग की थी, जिसे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सही मानते हुए 25 अप्रैल 2018 को, 3 महीने के भीतर ग्रामीण बैंको में भी पेंशन सुबिधा  लागू करने का निर्देश दिया था.


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