अब इन तीन सरकारी बैंको का विलय (Merger) करेगी सरकार


अब इन तीन सरकारी बैंको का विलय (Merger) करेगी सरकार
बैंक ऑफ़ बड़ौदा (Bank Of Baroda-BOB), देना बैंक (Dena Bank) और विजया बैंक (Vijaya Bank) के विलय (Merger) के बाद सरकार तीन अन्य सरकारी बैंको का विलय (Merger) करने जा रही है. जिसका ऐलान वित्त मंत्री अरुण जेटली के अमेरिका से लौटने के बाद हो सकता है. आपको बता दें,  इस समय वित्त मंत्री अरुण जेटली अपने इलाज के सिलसिले में अमेरिका में हैं. अपनी बीमारी की वजह से वो बजट पेश करने भी नहीं आ सके थे. उनकी जगह बजट कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने पेश किया था.Gramin bank news rrb news bank news banking pnb obc psb merger on cards will become second largest bank bank merger news amalgation of banks bank merger

RRBNEWS:- लेकिन अब खबरें आ रही हैं, की अरुण जेटली सही हो गए हैं. और जल्द ही भारत लौट सकतें हैं. खबर है जैसे ही वित्त मंत्री भारत लौटेंगे, सरकार पंजाब नेशनल बैंक (Punjab National Bank-PNB), ओरिएण्टल बैंक ऑफ कॉमर्स (Oriental Bank Of Commerce-OBC) और पंजाब एंड सिंध बैंक (Punjab And Sind Bank- PSB) के विलय (Merger) की घोषणा कर सकती है. सरकार की योजना इन तीनों बैंको को मिलाकर एक बड़ी बैंक बनाने की है. दरअसल मोदी सरकार की योजना सभी बैंको को मर्ज करके सिर्फ 4 या 5 सरकारी बैंक बनाने की है. पहले सरकार की योजना एरिया-वाइज पांच बैंक बनाने की थी. सरकार नार्थ- साउथ- ईस्ट- वेस्ट और सेंट्रल इंडिया के लिए अलग-2 बैंक बनाने का प्लान कर रही थी. अब आगे भी सरकार इसी फॉर्मूले पर आगे बढ़ेगी। या फिर पुरे देश में यह पाँचो बैंक एकसाथ काम करती रहेंगी। यह देखने वाली बात होगी।

BOB से छीन जाएगा दूसरे सबसे बड़े बैंक का ताज
अगर सरकार तय फॉर्मूले के तहत इन तीनो बैंको का विलय (Merger) करती है. तो यह बैंक देश SBI के बाद दूसरा सबसे बड़ा बैंक बन जाएगा। इस समय बैंक ऑफ़ बड़ौदा (Bank Of Baroda-Bob) देश का दूसरा सबसे बड़ा सरकारी बैंक है. लेकिन अगर सरकार पंजाब नेशनल बैंक (Punjab National Bank-PNB), ओरिएण्टल बैंक ऑफ कॉमर्स (Oriental Bank Of Commerce-OBC) और पंजाब एंड सिंध बैंक (Punjab And Sind Bank-PSB) के विलय (Merger) को अपनी मंजूरी दे देती है. तो बैंक ऑफ़ बड़ौदा (Bank Of Baroda-Bob) से देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक का ताज छीन जाएगा। और पंजाब नेशनल बैंक (Punjab National Bank-PNB) देश का दूसरा सबसे बड़ा सरकारी बैंक बन जायेगा।
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होगी कुल 17 लाख करोड़ की की जमा पूँजी

इन तीनों बैंको के विलय (Merger) से बनने वाले बैंक के पास लगभग 17 लाख करोड़ की जमा पूँजी होगी।

7.42 % होगा नयी बैंक का NPA
इन तीनो बैंको के मर्जर से बनने वाले नए बैंक का NPA 7.42 % होगा। वर्तमान में पंजाब नेशनल बैंक (Punjab National Bank-PNB) का NPA 8. 22 %, ओरिएण्टल बैंक ऑफ कॉमर्स (Oriental Bank Of Commerce-OBC) का 7. 15 % तथा पंजाब एंड सिंध बैंक (Punjab And Sind Bank- PSB) का Npa 6.93 % है.
फिर से खोलना पड़ सकता है खाता
इन तीन बैंकों के ग्राहकों को नए बैंक में अपना फिर से खाता खोलना होगा। इससे उनका पेपर वर्क काफी बढ़ जाएगा। ग्राहकों को खाता खोलने के लिए एक बार फिर से केवाईसी (KYC- Know Your Customer) की प्रक्रिया को दोहराना होगा। केवाईसी (KYC- Know Your Customer) हो जाने के बाद ग्राहकों को नई चेकबुक, एटीएम कार्ड और पासबुक मिलेगी।
सम्पूर्ण मर्जर के बाद बचेंगे सिर्फ पाँच सरकारी बैंक..
आपको बता दें, स्टेट बैंक के सफल मर्जर के बाद सरकारी स्तर पर बैंको के मर्जर के लिए काफी समय से मंथन चल रहा था। सरकारी योजना के मुताबिक़ मर्जर की पूरी प्रक्रिया के बाद सिर्फ 5 बड़े बैंक ही बचे रह पाएंगे. शेष बैंको का एरिया वाइज विलय (Merger) इन्ही पाँच बैंको में कर दिया जाएगा.
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5-Canara Bank
कितना कारगर होगा Merger.
दरअसल इस समय सभी सरकारी बैंको की NPA के बढ़ते बोझ से साँसे फूल रहीं हैं। सरकारी स्तर पर भी बैंको के डूबे हुए कर्ज को लेकर भारी चिंता है. बैंकों को इस स्थिति से निकालना सरकार के लिए मुसीबत बनता जा रहा है. मोदी सरकार में सरकारी बैंक इतिहास के अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहें हैं. SBI जैसा बाद बैंक पिछले तीन तिमाही से लगातार घाटे में है. आपको बता दें, SBI अपने इतिहास में पहली बार घाटे में गया है. बैंको को NPA से होने वाले घाटे से उबारने के लिए सरकार कॉस्ट-कट के फार्मूले को अपनाने जा रही है. दरअसल सरकार का मानना है कि बैंको के Merger से उनकी ऑपरेशन की लागत कम हो जाएगी. और बड़ी बैंक ज्यादा जोखिम के लिए सक्षम होगी.

Bank Merger शार्ट टर्म सोल्युशन
सरकार के बैंको के विलय (Merger) की नीति तात्कालिक स्तर पर कुछ राहत जरूर दे सकती है. लेकिन लम्बे समय में सरकार की यह नीति कारगर साबित होती नही दिख रही है. वर्तमान समय मे नए डिपॉजिट का 70% प्राइवेट बैंको के पास है.
नए लोन का भी 80% हिस्सा आज प्राइवेट बैंको के पास ही है. जबकि नेटवर्क के मामले में प्राइवेट बैंक सरकारी बैंकों से बहुत पीछे हैं. फिर आखिर क्यों सरकारी बैंक प्राइवेट बैंको से इतना पिछड़ रहें हैं.
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