ग्रामीण बैंको में सरकार डालेगी 20000 करोड़ की कैपिटल


ग्रामीण बैंको में सरकार डालेगी 20000 करोड़ की कैपिटल
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देश के गरीब, वंचित व किसानों को वित्तीय सेवाएं देने वाले ग्रामीण बैंको में सरकार 20000 करोड़ डालने जा रही है। ET की खबर के मुताबिक सरकार देश के सभी ग्रामीण बैंको में कुल 20000 करोड़ रुपये डालेगी। दरअसल ग्रामीण बैंको में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक पेंशन लागू होने के बाद हर ग्रामीण बैंक को एक पेंशन फण्ड बनाना होगा। जिसमें पूंजी बैंको के लाभ-हानि खाते से डाली जानी है। एकसाथ इतनी रकम जाने से पहले से वित्तीय रूप से कमजोर ग्रामीण बैंको के घाटे में जाने के कयास लगाए जाने लगे हैं। इसी की भरपाई के लिए सरकार ग्रामीण बैंको में 20000 करोड़ डालने पर विचार कर रही है।
Department of financial services ने NABARD को दिए आदेश.. 
ET की खबर के मुताबिक वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले Department Of Financial Services ने NABARD को इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिये हैं। और इसी आदेश को आगे बढ़ाते हुए नाबार्ड भी सभी RRB को इस संबंध में निर्देशित कर चुकी है। नाबार्ड ने सभी ग्रामीण बैंको से पेंशन की वजह से उन पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ का ब्यौरा मांगा हैं। अनुमान के मुताबिक पेंशन की बहाली होने से देश के ग्रामीण बैंको पर लगभग 20000 हज़ार करोड़ का भार पड़ेगा। और सरकार द्वारा भी इतनी ही पूँजी ग्रामीण बैंको में डाली जाएगी।
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50% केंद्र सरकार, 35 % देगी स्पांसर्स बैंक 
इस 20000 हज़ार करोड़ में से 50% रकम केंद्र सरकार सीधे ग्रामीण बैंको को देगी। जबकि 35% रकम संबंधित स्पोंसर्स बैंक को देना होगा। और शेष रकम राज्य सरकारें देंगी। दरअसल ग्रामीण ग्रामीण बैंको में केंद्र, राज्य और स्पोंसर्स बैंक की क्रमशः 50%, 15% और 35% कि हिस्सेदारी होती है। इसी हिस्सेदारी के हिसाब से केंद्र सरकार 50%, राज्य सरकार 15% और संबंधित प्रायोजक बैंक 35% रकम देगी.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी ग्रामीण बैंक कर्मियों को आधी-अधूरी पेंशन।

दरअसल ग्रामीण बैंको की यूनियन सरकार द्वारा लागू की गई मौजूदा पेंशन स्कीम से खुश नही हैं। वो लगातार सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आत्मा मारने का आरोप लगाते हैं। पेंशन की कट-ऑफ डेट को लेकर भी ग्रामीण बैंक कर्मियों में खासा नाराजगी है। इसके अलाबा अन्य कई मुद्दों पर भी ग्रामीण बैंक कर्मी सरकार द्वारा लागू की गई पेंशन से खुश नही हैं। ग्रामीण बैंको की सबसे बड़ी यूनियन एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट जाने पर विचार कर रही है। यूनियन पेंशन विसंगतियों को दूर करने को लेकर दो दिन की हड़ताल भी कर चुकी है। लेकिन सरकार इस मुद्दे पर अब कुछ और करने के मूड में नही है। पहले भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बिना सरकारों ने यह मुद्दा 20 साल तक लटका के रखा. ऐसे में बिना कोर्ट के आदेश के सरकार से कोई भी अपेक्षा करना नादानी ही है। 
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1 comments:

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February 10, 2019 at 5:29 AM ×

We happened with timeof india news and,thanks to supreme court of india justify for rural poor banking economy

Congrats bro Jagpal Singh Gour you got PERTAMAX...! hehehehe...
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