भारत के 14 बैंको का राष्ट्रीयकरण Nationalization Of Banks) कब हुआ और क्यो हुआ

भारत के 14 बैंको का राष्ट्रीयकरण Nationalization Of Banks) कब हुआ और क्यो हुआ 
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RRBNEWS:- 1969 तक देश मे सिर्फ एक सरकारी बैंक था। जो स्टेट बैंक ऑफ इंडिया State Bank Of India (SBI) था। जिसका राष्ट्रीयकरण 1955 में हुआ था। लेकिन 1955 में State Bank Of India (SBI) के राष्ट्रीयकरण (Nationalization) के बाद भी 1969 तक देश की 80% पूँजी निजी क्षेत्र के 14 बैंको के पास थी। हालात यह थे, की कोई गरीब इन बैंको में घुसने की हिम्मत भी नही कर पाता था। यह बैंक सिर्फ अमीरों के बैंक थे। और उन्हीं के लिए वित्तीय सेवाएं देते थे। इन सभी 14 बैंको की कमान निजी हाथों के उधोगपतियों के पास थी। जब इंदिरा गाँधी ने, 1967 में, लाल बहादुर शास्त्री जी की मृत्यु के बाद देश के प्रधानमंत्री का पद सँभाला। तब उन्हें कांग्रेस की गूँगी गुड़िया कहा जाता था। उस समय कांग्रेस में वामपंथियों की एक खास लॉबी काफी ताकतवर हुआ करती थी। और इन्होंने कांग्रेस को दो हिस्सों में तोड़ दिया था। और आज जो कांग्रेस हमारे सामने है, वो इंदिरा की कांग्रेस है। खैर आज हमारा यह टॉपिक नही है। इसलिए हम इससे ज्यादा बात इसपर नही कर रहें हैं। 

1969 तक देश के आर्थिक हालात, और इंदिरा गाँधी 

जब 1967 में इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री बनी। तब देश की वित्तीय हालत बहुत अच्छी नही थी। एक तरफ इंदिरा को लोग कांग्रेस की गूँगी गुड़िया कहते थे। तो दूसरी तरफ देश के बैंक सिर्फ कुछ चुनिंदा लोगो के लिए काम कर रहे थे। यह बैंक देश के गरीबों के लिए काम ना करके सिर्फ उन्हीं क्षेत्रो में पैसे निवेश करते थे। जहाँ मुनाफे की बेहतर संभावना होती थी। उधर इंदिरा गाँधी अपनी खुद की गूँगी गुड़िया वाली छवि को बदलने के लिए बेताब थी। इंदिरा गाँधी ने बड़े फैसले लेने की शुरुआत की। 1967 में इंदिरा गाँधी ने कांग्रेस का दस सूत्रीय कार्यक्रम पेश किया। जिसके प्रमुख बिन्दु कुछ इस प्रकार थे।

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1. बैंको पर सरकार का नियंत्रण
2. राजा-महाराजाओं को मिलने वाली पेंशन को बंद करना। जिसे दुनिया पीवी पर्स के  नाम स जानती है। 
3.न्यूनतम मजदूरी का निर्धारण करना।
4. आधारभूत संरचना का विकास।
5. कृषि, लघु उधोग व निर्यात में निवेश।

इसके बाद 19 जुलाई 1969 में इंडिया गाँधी ने देश के इन्ही 14 सबसे बड़े बैंको के राष्ट्रीयकरण (Nationalization) का अध्यादेश जारी कर दिया। इन 14 बैंको में सभी बैंक शामिल थे जिनके पास 50 करोड से ज्यादा की राशि जमा थी। इस अध्यादेश का नाम था, "बैंकिंग कंपनी(अधिकरण, उत्तरदायित्व, हस्तांतरण) अध्यादेश"1969 था। बाद में इसी नाम से एक विधेयक पारित हुआ और यह क़ानून बन गया। 
14 बैंको के नाम

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  1. Allahabad Bank
  2. Bank of Baroda
  3. Bank of India
  4. Bank of Maharashtra
  5. Central Bank of India
  6. Canara Bank
  7. Dena Bank
  8. Indian Bank
  9. Indian Overseas Bank
  10. Punjab National Bank
  11. Syndicate Bank
  12. UCO Bank
  13. Union Bank
  14. United Bank of India

राष्ट्रीयकरण (Nationalization) का उद्देश्य

1969 तक देश के बैंक सिर्फ अमीरों के लिए बैंकिंग करते थे। इसे क्लास बैंकिंग कहा जाता था। लेकिन इंदिरा चाहती थी कि इन बैंको का फायदा देश के गरीबों को हो। वो बैंको से गरीबों को जोड़ना चाहती थी। इसलिए इंदिरा ने 19 जुलाई 1969 में इन बैंको का राष्ट्रीयकरण (NATIONALIZATION OF BANKS)(Nationalization) कर दिया। जिसके बाद बैंक देश के दूर दराज के इलाकों में फैलने लगे। और इन बैंको द्वारा की जाने वाली क्लास बैंकिंग, मास बैंकिंग में बदलने लगी। इंदिरा अपने उद्देश्य में सफल हुई। आगे चलकर यह बैंक गरीबों और किसानों का के लिए सबसे बड़ा सहारा बने। 
इसके अलाबा इंदिरा चाहती थी कि यह बैंक देश के कृषि, लघु व मध्यम उधोगों, छोटे व्यापारियों को सरल शर्तों पर वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराएं, व आमजन को बैंकिंग सेवाओं से जोड़े।
एक अन्य कारण बैंको को ज्यादा पेशेवर बनाना व वित्तीय संसाधनों का विकेंद्रीकरण करना भी था। दरअसल आज़ादी के बाद देश के हाल कुछ ऐसे थे। कि कुछ लोगो के पास ही देश की सारी दौलत थी। अमीर और गरीब के बीच का गैप बहुत ज्यादा था।

राष्ट्रीयकरण (Nationalization) के नतीजे।

भारतीय बैंकिंग सेक्टर में प्रमुख 
वाणिज्यिक बैंको (Commercial Banks)  के राष्ट्रीयकरण (Nationalization) की घटना बैंकिंग सेक्टर में एक युगप्रवर्तक घटना मानी जाती है। राष्ट्रीयकरण (Nationalization) के साथ ही भारत के सामाजिक व आर्थिक विकास के एक नए सफर की शुरुआत हुई। राष्ट्रीयकरण (Nationalization) के बाद देश भारतीय बैंक लाभ अर्जित करने वाले एक उधोग से बढ़कर भारतीय समाज के गरीब, शोषित, वंचित तबकों के सामाजिक एवं आर्थिक व सामाजिक पुनरुत्थान का प्रमुख माध्यम बने। 


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इन बैंको के राष्ट्रीयकरण (Nationalization) के बाद भारत मे विकास के एक नए युग की शुरुआत हुई। जिसका क्रेडिट पूरी तरह से तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी को जाता है।

राष्ट्रीयकरण (Nationalization) के प्रमुख लाभ.

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1. राष्ट्रीयकरण (Nationalization) के कुछ एक सीमित क्षेत्रों में काम करने वाले बैंक देश के दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में फैलने लगे।

2.किसान, लघु उधोगों को वित्तीय सहायता मिलने का रास्ता खुला, जिससे इन उधोगों को फलने-फूलने के नए अवसर मिले।

3. लोन पोर्टफोलियो में कुल लोन के 40% को PSL (कृषि, लघु उधोग) के लिए आरक्षित किया गया। बैंको द्वारा दिये जाने वाले कुल लोन के 40% को कृषि क्षेत्र के लिए अनिवार्य कर दिया गया। व अन्य प्राथमिक उधोगों के लिये भी आसान लोन की व्यवस्था की गई। 

4. बैंको का बिज़नेस ग्रामीण क्षेत्रों तक फैलने लगा। आंकड़ों के मुताबिक जुलाई 1969 में देश के बैंको की कुल शाखाओं की संख्या 8322 थी। जो 1994 आते आते 60 हज़ार के पार पहुँच गयी। और 2018 में को पर कर गई। 

5.बैंको के राष्ट्रीयकरण (Nationalization) से देश मे आर्थिक जिम्मेदारी के एक नए युग की शुरुआत हुई। लोगों ने अपने पैसे को बैंको में जमा करना शुरू किया। जिससे यह पैसा देश के अन्य सेक्टरों मसलन उधोगों व कृषि को जरूरी लोन मिल पाया। 

कुल मिलाकर बैंको का राष्ट्रीयकरण (NATIONALIZATION OF BANKS)(Nationalization) भारत के आर्थिक इतिहास में एक क्रांतिकारी घटना हुई। आज हम जो सम्पन्न व आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर भारत देख रहें है। अगर इंदिरा गाँधी सरकार ने बैंको के राष्ट्रीयकरण (Nationalization) का फैसला ना लिया होता। तो सायद आज हम जिस रूप में भारत को देख पा रहें हैं वो कभी सम्भव ना था।

राजनीति और बैंको का राष्ट्रीयकरण (NATIONALIZATION OF BANKS)(Nationalization)

राजनैतिक रूप से लोगो ने बैंको के नेटवर्क और मौजूदा स्वरूप का भरपूर फायदा उठाया है। लेकिन उन्होंने कभी इंदिरा गाँधी को इसका क्रेडिट नही दिया। जबकि हकीकत यही है अगर इंदिरा गाँधी ने बैंको का राष्ट्रीयकरण (NATIONALIZATION OF BANKS)(Nationalization) ना किया होता तो ना तो जन-धन योजना सफल होती। ना ही जीवन ज्योति, सुरक्षा बीमा, मुद्रा जैसी योजनाएं कभी सफल हो पाती। और जिस Direct Benifit Transfer योजना पर सरकारें इतराती है। वो भी बिना राष्ट्रीयकरण (Nationalization) के कभी सम्भव ना हो पाती। कुल मिलाकर अटल बिहारी सरकार से लेकर मोदी सरकार तक सभी सरकारो ने बैंको का अपना राजनैतिक हित साधने के लिए भरपूर इस्तेमाल किया है। लेकिन पता नही क्यो, इन लोगों ने कभी इंदिरा गाँधी को इसका क्रेडिट नही दिया। 

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